सारे हथकंडे अपनाए,
लौट के बुद्धू घर को आए,
होनी टाल न पाया कोई,
अंधियारे को कौन भगाए,
पछताने से क्या होगा अब,
वक्त के रहते अक्ल न आए,
जोश,हौसला और जवानी,
करे वही जो मन को भाये,
छोड़ गया संसार मुसाफ़िर,
चिंता क्यों रह-रहकर खाए,
साथ गया ना बंगला गाड़ी,
ख़ाली हाथ जगत से जाए,
करले नाम कमाई 'गुंजन',
अंत समय में ना पछताये,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'
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