होती नहीं है सबकी आसान ज़िन्दगी,
है दोस्त कहीं तो कहीं हैवान ज़िन्दगी,
जद्दोजेहद के बीच भी कोई उबर गया,
ताउम्र रह न पाये परेशान ज़िन्दगी,
मौसम की तरह लोग बदलते हैं मुखौटा,
पहचान न पाये कभी इंसान ज़िन्दगी,
जज़्बात में ही बह गए हैं ख़्वाब गाह भी,
ख़ुद का लिखा मिटा रही उन्वान ज़िन्दगी,
अपने ही जान ले रहे अपनों की आज तो,
गैरों पे भी कितनों ने की कुर्बान ज़िन्दगी,
गफलत में मत गुज़ार हैं दिन चार प्यार के,
कुछ कद्र करो ख़ुद की है मेहमान ज़िन्दगी,
खुशियों से भरो दामन 'गुंजन' यक़ीन कर,
धनवान बना देती है मुस्कान ज़िन्दगी,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'
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