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श्रीसिद्धिदात्रीस्तोत्रम्

                
                                                         
                            कमलासने सिद्धिदात्रि, जगदम्बे सनातनि।
                                                                 
                            
भक्तानां वरदे देवि, नमस्तुभ्यं नमो नमः॥ १॥

चतुर्भुजे महादेवि, शङ्खचक्रगदाधरे।
पद्महस्ते महाशक्ते, प्रसीद परमेश्वरि॥ २॥

ज्ञानभक्तिप्रदे देवि, करुणामृतवर्षिणि।
ज्ञानं भक्तिं च मे देहि, मातः सिद्धिप्रदायिनि॥ ३॥

अणिमाद्याः सिद्धयः सर्वाः, त्वयि देवि प्रतिष्ठिताः।
सिद्धिदात्रि नमस्तुभ्यं, सर्वसिद्धिप्रदायिनि॥ ४॥

अविद्यां नाशय देवि, ज्ञानदीपं च दीपय।
चित्तशुद्धिं प्रयच्छ त्वं, मुक्तिमार्गं प्रदर्शय॥ ५॥

श्रद्धां मे देहि मेधां च, धैर्यं शान्तिं तथैव च।
सन्मार्गे मां नय त्वं, मातः सिद्धिप्रदायिनि॥ ६॥

भक्तवत्सले कल्याणि, शरणागतपालिनि।
दुःखं हर ममाम्ब त्वं, रक्ष मां परमेश्वरि॥ ७॥

सर्वमङ्गलदात्रि त्वं, सर्वसौभाग्यदायिनि।
प्रसीद जगदम्ब त्वं, नमस्तुभ्यं पुनः पुनः॥ ८॥

सिद्धिं बुद्धिं च मे देहि, भक्तिं मुक्तिं च देहि मे।
त्वत्पादयोर्मे भक्तिं स्थिरां कुरु, महेश्वरि॥ ९॥
- सनातन मुकुंद
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3 घंटे पहले

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