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श्रीनारीशक्त्यष्टकम् : आदिशक्तेर्दिव्याभिव्यक्तिः

                
                                                         
                            नवदुर्गास्वरूपा या, धैर्यसाहससंयुता।
                                                                 
                            
महालक्ष्मीगुणैर्युक्ता, सरस्वतीगुणान्विता॥ १॥

करुणाममतायुक्ता, विवेकज्ञानशालिनी।
स्नेहेन लोकं पोषयेत्, प्रज्ञया मोहं नाशयेत्॥ २॥

स्वाभिमानसमायुक्ता, स्वातन्त्र्येण विराजते।
सृजनस्य प्रेरिका या, शक्तिराद्या सनातनी॥ ३॥

चैतन्यदीपिका नारी, तेजस्विनी गुणान्विता।
यत्र नार्यः समादृताः, तत्र श्रीः शान्तिरेव च॥ ४॥

प्रबुध्यतां नारीशक्तिः, ज्ञानज्योतिः प्रवर्धताम्।
करुणा वर्धतां नित्यं, विश्वशान्तिः प्रतिष्ठताम्॥ ५॥

नारीशक्तिं नमस्यामि, जगन्मातृस्वरूपिणीम्।
सर्वमङ्गलदात्रीं तां, वन्दे भक्त्या पुनः पुनः॥ ६॥

विद्यया दीप्यते नारी, प्रज्ञया च विराजते।
लोकहिताय सदा युक्ता, सृष्टिशक्तिः सनातन॥

नारीणां मानरक्षायै, जागरूकं भवेज्जगत्।
मैत्रीकरुणयोर्वृद्ध्या, विश्वशान्तिः प्रवर्धताम्॥ ८॥
- सनातन मुकुंद
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3 घंटे पहले

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