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श्रीकात्यायनीमातृस्तोत्रम्

                
                                                         
                            कात्यायनि महादेवि, महाशक्तिस्वरूपिणि।
                                                                 
                            
विश्ववन्द्ये जगन्मातः, भक्तानुग्रहकारिणि॥

महिषासुरमर्दिनि, दुष्टदर्पविनाशिनि।
धर्मसंस्थापनपरे, दानवदर्पनाशिनि॥

त्रिनेत्रे तेजसां राशे, सिंहवाहिनि शोभने।
शिवप्रिये शुभे मातः, सर्वमङ्गलदायिनि॥

भक्ताभीष्टप्रदे देवि, करुणामृतवर्षिणि।
अज्ञानतिमिरध्वंसिनि, ब्रह्मविद्याप्रकाशिनि॥

चित्तशुद्धिप्रदे मातः, सद्बुद्धिपथदर्शिनि।
श्रद्धाभक्तिप्रदायिनि, साधकाभयहारिणि॥

योगिवन्दितचरणे, वेदवेदान्तसंस्तुते।
आदिशक्ते परे मातः, त्रिगुणातीतरूपिणि॥

कात्यायनि नमस्तुभ्यं, जगदाधाररूपिणि।
ज्ञानं भक्तिं च मे देहि, धैर्यं तेजश्च सर्वदा॥

शरणागतपरित्राणपरायणे, दीनदुःखविनाशिनि।
प्रसीद परमेशानि, नमस्ते भक्तवत्सले॥
-सनातन मुकुंद
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3 घंटे पहले

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