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श्रीकालरात्रिमातृस्तोत्रम् ।।

                
                                                         
                            नमः कालरात्र्यै देवि, महाशक्तिस्वरूपिणि।
                                                                 
                            
भक्ताभयप्रदे मातः, जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥

घोररूपे महादेवि, दुष्टदर्पविनाशिनि।
अज्ञानतिमिरध्वंसिनि, ज्ञानज्योतिःप्रकाशिनि॥

कृष्णवर्णे विशालाक्षि, चतुर्भुजे शिवप्रिये।
खड्गखेटकधारिणि, दुष्टसंहारकारिणि॥

शुभङ्करि शिवे मातः, सर्वमङ्गलदायिनि।
भयशोकविनाशिनि, करुणामृतवर्षिणि॥

कालस्वरूपिणि देवि, कालातीतस्वरूपिणि।
सृष्टिस्थितिलयकारिणि, विश्वचैतन्यरूपिणि॥

योगिध्येये पराशक्ते, ब्रह्मविद्याप्रकाशिनि।
चित्तशुद्धिप्रदे मातः, भक्तिमुक्तिप्रदायिनि॥

शरणागतपालिनि, दीनदुःखविनाशिनि।
धैर्यं तेजो बलं ज्ञानं, देहि मे परमेश्वरि॥

कालरात्रि नमस्तुभ्यं, जगदाधाररूपिणि।
प्रसीद परमेशानि, पाहि मां भक्तवत्सले॥
- सनातन मुकुंद
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3 घंटे पहले

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