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श्रीभारतमातृस्तोत्रम्

                
                                                         
                            वन्दे परं ब्रह्म नित्यमद्वयं च चराचरम्।
                                                                 
                            
यतोऽभवद् विश्वमिदं तदेव चेश्वरः स्वयम्॥ १॥

यस्य प्रसादाद् ऋषयः समभवंश्च कवयः।
तं सच्चिदानन्दमीडे हृदि भजामि सर्वदा॥ २॥

या वेदवाणी तपसा समन्विता विभाविता।
या धर्मरेखा ऋषिभिः सनातनी विनिर्मिता॥ ३॥

तां भारतीं विश्वहितप्रदीपिकां सुशोभनाम्।
ध्यायाम्यहं तां जननीं नमामि च मुदा सदा॥ ४॥

हिमाद्रिमौलिं जलधेर्वसानिनीं शुभप्रदाम्।
गङ्गादिनद्यः स्तनयोरिव स्थिताः पयोभृताम्॥ ५॥

ऋषिप्रसूतिं तपसा, विभूषितां परां मुदा।
सतीं वन्दे महाभागां, भारतमातरं भजे॥ ६॥

प्रसीद मातर्भरत, सर्वलोकेश्वरि प्रिये।
प्रसीद धर्मसंस्थे च, विवेकदायिनि शुभे॥ ७॥

प्रदेहि नित्यं स्वजनान्, आशिषं च परां मुदा।
राष्ट्रं सदा परिपाहि, शाश्वतं तं भजे सदा॥ ८॥

— श्री सनातन मुकुंद
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5 घंटे पहले

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