आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शैलपुत्री : संकल्प से शिवत्व तक : छंदमुक्त दार्शनिक गीतिका

                
                                                         
                            हिमगिरि के हिमशिखर पर, ज्योति का शृंगार हो,
                                                                 
                            
वृषभ-पदों से धरा-हृदय में, धर्म का संचार हो।
चंद्रकला की शीतल आभा, मंगलमय संसार हो,
शैलसुते! तेरी कृपा से, चेतना साकार हो॥

शैल-सा संकल्प जागे, सिंधु-सा विस्तार हो,
मोह-तिमिर पर विवेक का, प्रखर प्रहार हो।
एक कर में कोमल सुमन, दूजे में त्रिशूल,
मृदुलता में शक्ति जागे, शक्ति में कल्याण हो॥

मूलाधार में दीप जले, प्राण में प्रणव झंकृत,
सुप्त कुण्डलिनी जाग उठे, अंतःकरण हो पावन।
जड़ शिलाओं के हृदय में, चैतन्य सुधा भर दे,
माँ! तुम्हारे स्पर्श से, आत्मबोध जागे॥

नंदी की निष्ठा सिखाए, धर्म-पथ पर अविचल,
चंद्रकिरण-सी शीतलता, अंतर्मन करे निर्मल।
शैल की स्थिरता में छिपा, साधना का मर्म है,
त्याग में वैभव निहित है, मौन में ब्रह्मस्वरूप॥

हे गिरिजे! मन-मेरु पर, ज्ञान-सूर्य का उदय हो,
वासना के मेघ विलय हों, अंतस आलोकमय हो।
तेरे चरणों में गल जाए, अहंकार का पाषाण,
बूँद सिंधु में मिलकर हो, शिव से एकाकार॥

जय शैलपुत्री! जगज्जननी! आदिशक्ति वरदायिनी,
भक्ति-वीणा पर जाग उठे, नाद-ब्रह्म की रागिनी।
तेरी वंदना से मिटे, द्वैत-जनित विषाद,
माँ! हृदय-मंदिर में गूँजे, अद्वैत का नाद॥
- सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर