आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शब्दों की ज्योति

                
                                                         
                            साहित्य दीप जलाता है,
                                                                 
                            
जीवन-पथ दिखलाता है।
मन का तम हर लेता है,
नई प्रभा ले आता है।

दुःख में धीरज, सुख में संयम,
जीने का ढंग सिखाता है।
प्रेम-दया-सत्य के स्वर से,
मन को निर्मल करता है।

साहित्य दीप जलाता है,
जीवन-पथ दिखलाता है।

संस्कृति की थाती सँजोकर,
पीढ़ी-पीढ़ी सौंपता है।
मौन अधरों को स्वर देकर,
सोई चेतन जगाता है।

साहित्य दीप जलाता है,
जीवन-पथ दिखलाता है।

शब्द नहीं, ये भाव-सरोवर,
मन की प्यास बुझाता है।
मन से मन को जोड़कर,
मानवता का मान बढ़ाता है।

साहित्य दीप जलाता है,
जीवन-पथ दिखलाता है।

शब्द रहें या मौन हो जाएँ,
भाव कभी मरते नहीं;
युग बीतें, इतिहास बदलें,
सत्य कभी मिटते नहीं।

जो अंतर में दीप जला दे,
जो जीवन को स्वर दे जाए;
मानवता की धड़कन बनकर,
साहित्य युग-युग गाता जाए।
-सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर