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पितृदेवों को श्रद्धांजलि : श्रद्धांजलिपरक–भावांजलि

                
                                                         
                            जिनसे जीवन, जिनसे संस्कारों का उजियारा है,
                                                                 
                            
उनके पुण्य-प्रताप से ही अस्तित्व हमारा है।

उनकी तप-सुरभि, अंतस में आज भी महकती है,
पितृ-वचनों की ज्योति, जीवन में नित दमकती है।

देह पंचतत्त्व में विलीन हुई, स्मृतियाँ अमर रहें,
उनके आदर्शों से सिंचित, वंश-विटप फलते रहें।

श्रद्धा-सुमन अर्पित उनको, नयनों में अश्रु-धार,
हे पितृदेव! चरणों में आपके, वंदन बारंबार।
-सनातन मुकुंद
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एक घंटा पहले

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