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नागपंचमी : आस्था, परंपरा और प्रकृति का पर्व

                
                                                         
                            नागदेव! तुमको शत-शत नमन, श्रद्धा से शीश झुकाएँ,
                                                                 
                            
धरती के रक्षक बनकर तुम, जीवन-पथ सुखमय बनाएँ।

शिव के कंठ सुशोभित होकर, शिव-महिमा को बढ़ाते,
नागपंचमी के पावन दिन, जन-जन मंगल-दीप जलाते।

धरती, वन, जल, जीव-जगत का, तुमसे नाता प्यारा,
प्रकृति-संरक्षण का देते, जग को शुभ संदेश न्यारा।

श्रद्धा-भाव हृदय में लेकर, सच्ची पूजा हो जाए,
जीवमात्र में ईश्वर-दर्शन, मन में करुणा जगाए।

परंपरा में प्रकृति-संरक्षण, आस्था में उपकार,
नागपंचमी सिखलाती हमें, जीव-जगत का सत्कार।

शिव-शक्ति की पावन छाया, सबके जीवन में आए,
नागदेव! धरती पर सुख-शांति, मंगल-वर्षा बरसाए।

— श्री सनातन मुकुंद
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2 महीने पहले

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