नागदेव! तुमको शत-शत नमन, श्रद्धा से शीश झुकाएँ,
धरती के रक्षक बनकर तुम, जीवन-पथ सुखमय बनाएँ।
शिव के कंठ सुशोभित होकर, शिव-महिमा को बढ़ाते,
नागपंचमी के पावन दिन, जन-जन मंगल-दीप जलाते।
धरती, वन, जल, जीव-जगत का, तुमसे नाता प्यारा,
प्रकृति-संरक्षण का देते, जग को शुभ संदेश न्यारा।
श्रद्धा-भाव हृदय में लेकर, सच्ची पूजा हो जाए,
जीवमात्र में ईश्वर-दर्शन, मन में करुणा जगाए।
परंपरा में प्रकृति-संरक्षण, आस्था में उपकार,
नागपंचमी सिखलाती हमें, जीव-जगत का सत्कार।
शिव-शक्ति की पावन छाया, सबके जीवन में आए,
नागदेव! धरती पर सुख-शांति, मंगल-वर्षा बरसाए।
— श्री सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X