हिमशिखर-सी धवल प्रभा, तेजोमयी माँ,
शुचिता-सुधा बरसाओ, करुणामयी माँ।
श्वेताम्बरा, वृषवाहिनी, शिवा कल्याणी माँ,
महागौरी, जगज्जननी, मंगलदायिनी माँ।
चित्त-विकार हरकर, ज्ञान-ज्योति जगाओ माँ,
मोहावरण को भेदकर, आत्मज्ञान दिलाओ माँ।
राग-द्वेष का क्षय करके, समदृष्टि जगाओ माँ,
अहं-तिमिर हरकर, आत्मतत्त्व दिखलाओ माँ॥
ज्योतिर्मयी माँ, दिव्य प्रकाश जगाओ माँ,
सुख-शान्ति दो, अन्तर्ज्वाला बुझाओ माँ।
चन्द्रकला-सी शीतल, चित्त-ताप हरो माँ,
चित्त-दर्पण में ब्रह्मप्रभा दिखलाओ माँ॥
तन-मन शुद्ध करो, चित्त निर्मल बनाओ माँ।
सत्य-अहिंसा से जीवन-सुमन खिलाओ माँ।
शुचिता-शान्ति की दिव्य चेतना जगाओ माँ,
महागौरी! आत्मबोध की दिव्य प्रेरणा हो माँ॥
-सनातन मुकुंद
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