जय माँ कालरात्रि,
जय करुणामयी भवानी,
जय अज्ञान-तिमिर-हारिणी,
जय शक्ति-स्वरूपा कल्याणी।
दुष्ट-दलनकारिणी,
भक्त-भय-हारिणी,
जय जगदम्बे माँ,
जय महाकल्याणी॥
घनघोर निशा में ज्योति तुम्हारी,
भय-तम हरती माँ, महिमा न्यारी।
नीलवर्णी, विकरालरूपा, करुणा अपार,
माँ, शरणागत का तू ही आधार॥
जय माँ कालरात्रि,
जय करुणामयी भवानी,
जय अज्ञान-तिमिर-हारिणी,
जय शक्ति-स्वरूपा कल्याणी॥
मन से भय मिटे, साहस जागे,
तेरी कृपा से नियति सँवरे।
संशय के सब बंधन टूटें, माँ,
ज्ञान-ज्योति से जीवन निखरे॥
काम-क्रोध का अंधकार हरना,
मोह-मद का अभिमान मिटाना।
सत्य-धर्म का पथ दिखाना,
अंतर्मन निर्मल बनाना॥
जय माँ कालरात्रि,
जय करुणामयी भवानी,
जय अज्ञान-तिमिर-हारिणी,
जय शक्ति-स्वरूपा कल्याणी॥
दीन-दुखी के कष्ट मिटाओ,
प्रेम-सुधा से जग महकाओ।
भेद-भाव की दीवारें ढहें,
विश्व-बंधुत्व की ज्योति जलाओ॥
श्रद्धा, शक्ति, विवेक दो माता,
भक्ति-पथ पर बढ़ता जाऊँ।
चरण-कमल में शीश झुकाकर,
तेरी महिमा नित्य ही गाऊँ॥
जय माँ कालरात्रि,
जय करुणामयी भवानी,
जय अज्ञान-तिमिर-हारिणी,
जय शक्ति-स्वरूपा कल्याणी।
दुष्ट-दलनकारिणी,
भक्त-भय-हारिणी,
जय जगदम्बे माँ,
जय महाकल्याणी॥
- सनातन मुकुंद
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