भीगी-भीगी रुत, महकते लफ़्ज़, तेरी यादों का मधुर संसार,
मोहब्बत की मंद बयार में धड़कता हर सपना साकार।
चाँदनी चुनर ओढ़े मन, प्रेम-दीप हर पल मुस्काए,
तेरे नाम की सरगम छेड़े, हर धड़कन गीत सुनाए।
फूलों-सी कोमल प्रीत हमारी, खुशबू बनकर जग महकाए,
नयनों की नीरव भाषा भी प्रेम-कथा मुस्काकर गाए।
स्नेह-सुधा से सिंचित जीवन, मधुमास-सा हर क्षण खिल जाए,
भीगी-भीगी रुत, महकते लफ़्ज़, मोहब्बत अमर सुर बन जाए।
- सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X