किसी को मुझसे है नफ़रत, कोई प्यार कर बैठा है,
किसी को मुझ पर यक़ीं नहीं, कोई ऐतबार कर बैठा है।
कितने रंग दिखाती दुनिया, कितने रूप निराले हैं,
कोई दूर हुआ है मुझसे, कोई दिल में बसा बैठा है।
कोई मेरी चुप्पी को भी अपना अभिमान समझता है,
कोई मेरी ख़ामोशी में अपना प्यार समझता है।
कोई मेरी राहों से अपनी राह बदलकर चलता है,
कोई मेरी राह निहारता, मिलने को तरसता है।
किसी को मेरी बातें तीर-सी दिल में चुभती हैं,
किसी को मेरी बातें मन में फूल खिलाती हैं।
कोई मेरी आँखों में केवल दोष ही ढूँढ़ता है,
कोई उन्हीं आँखों में अपना स्वप्न सँजोता है।
कोई मिलना नहीं चाहता, कोई मिलने को आतुर है,
कोई भूल चुका है मुझको, कोई हर पल याद करता है।
कोई मेरी यादों को अपने मन में भरता है,
कोई मेरी एक झलक देखने को तड़पता है।
मैं तो अपनी राह चलूँ, जैसा हूँ वैसा रहता हूँ,
किसी की नज़रों में अच्छा, किसी की नज़रों में बुरा हूँ।
लोग मुझे जिस रंग में देखें, वैसा ही रंग चढ़ता है,
हर कोई अपने मन का दर्पण साथ लिए फिरता है।
किसी को मुझसे है नफ़रत, कोई प्यार कर बैठा है,
किसी को मुझ पर यक़ीं नहीं, कोई ऐतबार कर बैठा है।
अजब है यह दुनिया, इसके रंग भी अजब निराले हैं,
कोई दूर हुआ है मुझसे, कोई दिल में बसा बैठा है।
- सनातन मुकुंद
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