आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तेरी वजह से

                
                                                         
                            गर मुझे मुकद्दर पे ऐतबार है, तो तेरी वजह से !
                                                                 
                            
घर का गुलशन गर गुलज़ार है, तो तेरी वजह से !
आज दुनिया मेरी तलबगार है, तो तेरी वजह से
मुझको अपनों से इतना प्यार है, तो तेरी वजह से !
तू ही बता दे कैसे भुला दूँ तुझको अय मेरे ख़ुदा,
आज मेरी रगों में खूं बरक़रार है, तो तेरी वजह से !
जब कभी मैं लड़खड़ाया बस तूने उठाया थाम कर,
मेरा खुशियों से भरा ये संसार है, तो तेरी वजह से !
घायल है आदमी इस दुनिया की ठोकरों से 'मिश्र,
मगर फिर भी दिलों में क़रार है, तो तेरी वजह से !
-शांती स्वरूप मिश्र
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर