गर मुझे मुकद्दर पे ऐतबार है, तो तेरी वजह से !
घर का गुलशन गर गुलज़ार है, तो तेरी वजह से !
आज दुनिया मेरी तलबगार है, तो तेरी वजह से
मुझको अपनों से इतना प्यार है, तो तेरी वजह से !
तू ही बता दे कैसे भुला दूँ तुझको अय मेरे ख़ुदा,
आज मेरी रगों में खूं बरक़रार है, तो तेरी वजह से !
जब कभी मैं लड़खड़ाया बस तूने उठाया थाम कर,
मेरा खुशियों से भरा ये संसार है, तो तेरी वजह से !
घायल है आदमी इस दुनिया की ठोकरों से 'मिश्र,
मगर फिर भी दिलों में क़रार है, तो तेरी वजह से !
-शांती स्वरूप मिश्र
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