जो गुज़रा है उसको, भुला कर तो देखिये
जो मौका है तेरे सामने, भुना कर तो देखिये
कल की तस्वीर बदल जायेगी ख़ुद व ख़ुद,
ज़िंदगी के हसीन सपने, सजा कर तो देखिये
न समझो कि नफरतों का अँधेरा ही है इधर
कभी मोहब्बतों के दीये, जला कर तो देखिये
टूट जाते हैं नाते रिश्ते चंद लफ़्ज़ों की बदौलत
ज़रा लगाम पैनी जुबां पे, लगा कर तो देखिये
क्यों पाल रखी है 'मिश्र' इतनी अकड़ दिल में
बदल जायेगा ये समां, सर झुका कर तो देखिये
-शांती स्वरूप मिश्र
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