शोहरत के नाम पर, यूं खुमार मत पालो
यूं अपनों के लिए दिल में, रार मत पालो
वक़्त का भी क्या पता कब बदल जाये,
यूं बेसबब ज़माने से , तक़रार मत पालो
जो दिया है खुदा ने ले लो सर झुका कर,
सब का सब तुम्हारा है, विचार मत पालो
जो कुछ है इस दुनिया में नेमत है उसकी,
खुद ही खुदा बनने का, विकार मत पालो
कभी तो उजड़ेगा ही ज़िंदगी का चमन भी,
भूल के इस बात को, झूठी बहार मत पालो
जी लो मुस्करा के जितनी भी बची है "मिश्र",
यूं फूलों की जगह दिल में, खार मत पालो
-शांती स्वरूप मिश्र
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