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ईमान बचा के रखिये

                
                                                         
                            इज़्ज़त बचानी है, तो ईमान बचा के रखिये !
                                                                 
                            
अपने हसीन सपनों को, यूँही सजा के रखिये !
गर अंधेरों से डर लगता है तो मुस्तैद हो कर,
आँधियों से अपने चरागों को, बचा के रखिये !
किस्मत के सहारे बैठ कर कुछ नहीं मिलता,
यारो हाथ पैरों में, ज़रा जुम्बिश बना के रखिये !
दर्द तो होता है दुनिया के दिए ज़ख्मों में यारा,
पर दिल के तूफां पे,ज़रा कब्ज़ा बना के रखिये !
तैयार बैठे हैं शिकारी ले कर फरेबों का जाल,
न आना किसी लोभ में, खुद को बचा के रखिये !
ग़लतफ़हमी में न रहिये "मिश्र" कि सब अपने हैं,
अपने दिल कि बातें ज़रा, दिल में छुपा के रखिये !
-शांती स्वरूप मिश्र
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3 महीने पहले

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