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चुप करा देती है दुनिया

                
                                                         
                            बात करें दिल की, तो चुप करा देती है दुनिया
                                                                 
                            
गर खामोश रहें तो, फसाना बना देती है दुनिया
जीना चाहें तो जी नहीं सकते अपनी तरह से हम,
गर मरना भी चाहें तो, पहरे बिठा देती है दुनिया
गर करना भी चाहें कुछ तो हम कर नहीं सकते,
क्यों कि हर कदम पर, टांग अड़ा देती है दुनिया
अगर टकराएं भी इससे तो क्या मिलेगा आखिर,
बग़ाबत के मारों को, सबक सिखा देती है दुनिया
घुस जाओ "मिश्र "तुम भी इस दुनिया की भीड़ में,
वरना तो हर अकेले को, नांच नचा देती है दुनिया
-शांती स्वरुप मिश्र
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2 महीने पहले

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