आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बदल के तो देखो

                
                                                         
                            ज़रा उदासियों का मौसम, बदल के तो देखो
                                                                 
                            
तुम कुछ कदम तो मेरे साथ, चल के तो देखो
उतर जायेगा बोझ सारा, तेरे दिल का अय यारा,
अपनी हसरतों को थोड़ा सा, बदल के तो देखो
यूं ही अंधेरों के दरमियां, बनाते क्यों हो तस्वीरें,
ज़रा दुनिया के उजालों में, निकल के तो देखो
ये पत्थर भी टूट जाते हैं, मोहब्बत की तपिश से,
ज़रा सा मोहब्बत के नाम से, पिघल के तो देखो
हमको तो है यक़ीन, तुम्हारी लियाक़तों पर दोस्त,
ज़रा ख्वाबों से थकी आँखों को, मसल के तो देखो
बहुत चल लिए तुम, ख़ारों से भरी राहों पे "मिश्र",गर पानी हैं खुशियों, तो रस्ता बदल के तो देखो
-शांती स्वरुप मिश्र
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर