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दिन स्वप्न पिटारा गिर कर

                
                                                         
                            एक दिन स्वप्न पिटारा गिर
                                                                 
                            
कर बिखर
जाएगा, मायावी आकाश की
तरह बहुत दूर कहीं तब
नज़र आएगा देह
का शून्य
पिंजर,
अंतरिक्ष में दिशाहारा पखेरू जाने -
किधर जाएगा, एक दिन स्वप्न
पिटारा गिर कर बिखर
जाएगा । जनारण्य
में जिसे खोजता
रहा वही छुपा
हुआ था
मेरे
हिय के अंदर, विवस्त्र मैं खड़ा था
अपने ही सामने और तलाशता
रहा न जाने किसे उम्र भर,
जो मुझे याद करता
रहा दिन - रात,
आँखों से
ओझल
होते
ही सब कुछ बिसर जाएगा, एक
दिन स्वप्न पिटारा गिर कर
बिखर जाएगा ।
- - शांतनु सान्याल
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एक महीने पहले

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