ये रास्ते तुझे छोड़ कर जायेंगे कहां
किसी और के निशान नहीं बनते यहां!
वो बात अलग है की तू खुद अपने कदमों को रोक दे!
जब ठान ले मुसाफिर अपनी मंजिल को!
मंजिलें आखिर जायेंगी कहां !!
हां वो बात अलग है की तू खुद अपनी मंजिल को छोड़ दे!!
-संजू मौर्य
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