आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ये रास्ते तुझे छोड़ कर जायेंगे कहां

                
                                                         
                            ये रास्ते तुझे छोड़ कर जायेंगे कहां
                                                                 
                            
किसी और के निशान नहीं बनते यहां!
वो बात अलग है की तू खुद अपने कदमों को रोक दे!
जब ठान ले मुसाफिर अपनी मंजिल को!
मंजिलें आखिर जायेंगी कहां !!
हां वो बात अलग है की तू खुद अपनी मंजिल को छोड़ दे!!
-संजू मौर्य
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर