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दिलनशीं कितना दिलरुबा पत्थर

                
                                                         
                            दिल नशीं कितना दिल रमा पत्थर
                                                                 
                            
मेरे दिल में समा गया पत्थर
प्यार से उसने छू लिया पत्थर
मौम जैसे पिघल गया पत्थर
उसका बोसा ज़माना लेता है
है जो लब पे मेरे इक लगा पत्थर
जाइए आप कोई बात नहीं
मैंने सीने पे रख लिया पत्थर
मैंने ने इज़हार आरज़ू जो किया
फूल सा था, वो हो गया पत्थर
मंज़िलों की तरफ़ मैं बढ़ता रहा
मुड़ के देखा न मील का पत्थर
उस पे कुछ भी असर नहीं है शकील
मेरा हमदम भी हो गया पत्थर
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एक घंटा पहले

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