खुद को वो अंदाज बना दो
दुनिया की आवाज बना दो
जिसमें सब अपनापन देखें
खुद को तुम वो खास बना दो
अमीर गरीब को जो समझे
ऐसा तख़्तो - ताज बना दो
ग़लती है फितरत इंसां की
माफ़ी को इलाज बना दो
जिसमें हम सब मिलकर गाएं
शाजिया तुम वो साज बना दो।
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