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कल फिर किसी के इश्क़ में ये दिल फिसल गया

                
                                                         
                            कल फिर किसी के इश्क़ में ये दिल फिसल गया
                                                                 
                            
अच्छा हुआ कि गिरने से पहले संभल गया

कल भी वही सवाल थे, जवाब भी वही
वो ही सवाल आज हैं, उत्तर बदल गया

पहले तो छूट छूट मे इतनी थी छूट दी
अब कह रहे हैं हाथ से बच्चा निकल गया

बन न सका ये आदमी, आदमी कभी
बस आदमी को छोड़ सभी सांचों में ढल गया

मय्यत को मेरी फूक के जल्दी में थे सभी
आते थे देखने यही, बाकी है, जल गया
-शैलेश अग्रवाल "नीर"
 
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3 महीने पहले

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