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कुछ शब्द गिरे अनंत से

                
                                                         
                            अनुभव की अदालत में
                                                                 
                            

अनुभव के काग़ज़ पर
लिखे गये अनगिनत

शब्द-

टूट कर गिरते हैं ,
आँखों की कोटरों से ,
कुछ दर्द भरे ,
कुछ प्रीत भरे I

कोई गुरु नहीं ,
कोई उस्ताद भी नहीं ,
न ही कोई ज़िल्द ,
किताब भी नहीं l

शब्दों की नदी
फिरती रही
अदृश्य पथ पर
अनुभव के रथ पर
अर्थ की खोज
जंगल, शहर
पहाड़, पत्थर
हर डगर |


अनुभव के पंखों से ,
उड़ते शब्द,
शब्द हवा में,
गिरते , चलते
करुणा, क्रोध,
मद, मोह
प्रेम, वियोग,
सुयोग लिए
यात्रा अनंत की
करते हैं |

कितने आए ,
और चले गए l
निपुण,सयाने
बीत गए l

अनुभव की ,
यूनिवर्सिटी में ,
जाने कितने ,
रीत गए|

कुछ शब्द
गिरे अनंत से ,
अनुभव की
कचहरी में ,
पेश हुई दलीलें ,
वकीलों की !

शब्द

अदालत के
कटघरे में
मौन खड़ा
दलीलें सुनाता रहा
अपनी किस्मत
का निर्णय
भाषा के
न्यायाधीश से
हक में करने की
अपील करता रहा |
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3 घंटे पहले

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