आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अनुभव के पंखों पर सवारी करते शब्द हवा में उड़ते , गिरते , चलते

                
                                                         
                            अनुभव के काग़ज़ पर लिखे अनगिनत शब्द-
                                                                 
                            

टूट कर गिरते हैं
आखों की कोटरों से
कुछ दर्द भरे कुछ प्रीत भरे

कोई गुरु नहीं ,
कोई उस्ताद भी नहीं ,
न ही कोई ज़िल्द ,
किताब भी नहीं

बहती है अनुभव की नदियाँ-
दृश्य-अदृश्य
हर बूटा -डाली

अनुभव के पंखों पर सवारी करते शब्द हवा में उड़ते , गिरते , चलते
करुणा, क्रोध, मद, मोह
प्रेम, वियोग, सुयोग लिए
यात्रा अनंत की करते हैं |

कितने आए और चले गए
निपुण,सयाने बीत गए
अनुभव की यूनिवर्सिटी में
जाने कितने रीत गए|

कुछ शब्द गिरे अनंत से ,
अनुभव की कचहरी में , पेश हुई दलीलें ,
वकीलों की !

शब्द

अदालत के
कटघरे में मौन खड़ा
दलीलें सुनाता रहा
अपनी किस्मत का निर्णय
भाषा के न्यायधीश से हक में करने की
गुजारिश करता रहा |

बहती है अनुभव की नदियाँ-
दृश्य-अदृश्य
हर बूटा -डाली

अनुभव के पंखों पर सवारी करते शब्द हवा में उड़ते , गिरते , चलते
करुणा, क्रोध, मद, मोह
प्रेम, वियोग, सुयोग लिए
यात्रा अनंत की करते हैं |

कितने आए और चले गए
निपुण,सयाने बीत गए
अनुभव की यूनिवर्सिटी में
जाने कितने रीत गए|
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर