राम ने रावण को नहीं अपितु
उसके अहंकार को मारा है
सीता हरण कर रावण ने
राम की गैरत को ललकारा है
नाक के चक्कर में यारों होती सदा लड़ाई है
शूर्पणखा ने भी देखो कैसे
जग में नाक कटाई है
नाक के चक्कर में विभीषण ने राज-पाट ठुकराया है
नाक हमेशा जग में दूर करती भाई से भाई है
नाक के कारण हुए हैं
युद्ध कई इतिहास में
राम को भी जाना पड़ा था
इसीलिए बनवास में
बाली को भी भैया उसके अहंकार ने मारा है
राम ने रावण को नहीं
अपितु उसके अहंकार को मारा है
हत्या नहीं राम ने की है
अहंकार हत्यारा है
सीता हरण कर रावण ने
राम की गैरत को ललकारा है
रावण भी तो शिवभक्त था
चारों वेदों का ज्ञान था
उसको भी तो पराक्रम का
अपने बड़ा अभिमान था
उसका भी तो त्रिलोक में
शासन बड़ा महान था
रावण ने तो शीश काटकर
किया शिवजी को दान था
अहंकार वश ही तो उसने
किया नंदी अपमान था
अपनी शक्ति के अहंकार में
देवों का करता नहीं सम्मान था
विनाश काले विपरीत बुद्धि: से रावण देखो हारा है
राम ने नहीं रावण को अहंकार मारा है
हत्या नहीं राम ने की है अहंकार हत्यारा है
आज भी कुछ रावण जो अहंकार में चूर हैं
भगवान का जप करते पर भक्ति से कोसों दूर हैं
ये रावण भी सत्ता की शक्ति के नशे में चूर हैं
उनको भी सत्ता का आया बड़ा गुरूर है
इसीलिए तो जग में कहावत अहंकार की मशहूर है
जो अहंकार के जाल में फंसा
भगवान ही उसका सहारा है
सत्ता ही से नहीं फिर वो जान से भी हारा है
राम ने नहीं रावण को उसके अहंकार ने मारा है
हत्या नहीं राम ने की है
अहंकार हत्यारा है
-अश्क़ फ़तेहपुरी
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