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मौत के आग़ोश में

                
                                                         
                            जा रहे हैं छोड़ के मौत के आग़ोश में
                                                                 
                            
किया ज़िंदगी को बर्बाद मुहब्बत के जोश में
जिंदगी ने पहना है जब कफ़न मौत का
कहते हैं यारों अब आ गए होश में

कफ़न भी था मैला लपेटा जो लाश पे
ए जिंदगी हो गया हूँ क्या
नज़रो से फरामोश मैं
देखी थी तजल्ली जब हुस्ने यार की
गवाँ दिए होश हो गया बेहोश मैं

इस आशिक़ को अता करूं
जन्नत या दोज़ख
ख़ुदा भी हो रहा परेशां इस सोच में

वो चमकती है महशर में
इक सफ अलग
कहीं ये आशिक़ तो नहीं
हैं मलायका भी खोज में

सीने से जला हुआ है कफ़न उनका
जब देखा उनको क़यामत के रोज़ में
हैं ये वो ही दिलजले शाहिद
जो दब के मरे हैं
मुहब्बत के बोझ में
-अश्क़ फ़तेहपुरी
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48 मिनट पहले

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