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अश्क़ ए ग़म

                
                                                         
                            मेरी मौत का मंज़र बहुत सुहाना होगा
                                                                 
                            
आशिक़ के जनाजे पे मुहब्बत का तराना होगा
मेरी कब्र पर फूल मत चढ़ाना यारों
वरना लोग कहेंगे किसी आशिक का ठिकाना होगा

इक हसरत दिल में लिए बैठा रहा मैं
ज़ख्म मुहब्बत के सेहत रहा मैं
वो देता रहा मुझे धोखे पे धोखा
उसी को मुहब्बत का ख़ुदा कहता रहा मैं

ग़म का वो मंज़र दिल में उतर गया
चाक वो मेरी मुहब्बत का दामन कर गया
अब दाग़ वफ़ा पर लगाने से क्या फायदा
मुहब्बत का खंजर दिल में उतर गया
-अश्क़ फ़तेहपुरी
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45 मिनट पहले

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