हो गई तसल्ली दिल को
अब नहीं डर आधियों का.
करना है अपने लिए अब कुछ
नहीं डर अब तूफानों का...
साथ सत्य का मिल गया,
अब क्या घबराना दोस्त?
बढ़ों आगे करो काम
यही उद्देश्य अब जीवन का..
-शाहाना परवीन 'शान'
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