तुम क्या जानो,
कितनी आधियों को हमने झेला है
कितने तूफ़ानों से हम गुज़रे हैं,
जो चेहरे पर आज सुकून दिखता है,
उसे आँसुओं से हमने सजाया है।
-शाहाना परवीन 'शान'
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