परख तो बहुत पहले ही
हो गई थी तुम्हारी,
पर हमारी ख़्वाहिश थी कि
तुम्हें एक मौका दिया जाए।
जब दिया मौका तुम्हें
तुम खरे न उतरे,
पर फिर दिल ने सिफारिश की
कि एक और मौका दिया जाए।
दो बार दिए गए मौको से,
तुम इतराने लगे,
गलती करके भी
तुम इठलाने लगे,
इस बार दिल ने कहा कि बस
अब और मौका नहीं...
तभी दिमाग ने कहा
चल छोड़ इसे 'शान'
यह किसी के लायक ही नहीं...
तू जी अपनी ज़िदगी और
इसे इसके हाल पर छोड़ दे।
-शाहाना परवीन 'शान'...
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