खामखा तुम मेरी जिंदगी में आए
बेकार में ही झूठे वादे निभाए।
इससे अच्छा तो होता कि
हम मिले ही न होते
झूठ की नींव पर तुमने
रिश्तों के महल बनाए।
-शाहाना परवीन 'शान'
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