क्या ही होगा अब
जो अब तक न हुआ।
बरसो किया इंतजार
कोई अपना न हुआ।
क्या जरूरत आगे
जो होगा वो भी देखा जाएगा
फालतू अहसासों का जमाबड़ा न हुआ।
-शाहाना परवीन 'शान'.
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