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जो रूह को छू कर गुज़रे न

                
                                                         
                            जो रूह को छू कर गुज़रे न, उस प्यार को हम क्या नाम दें,
                                                                 
                            
ये तो महज़ एक ख़्वाहिश है, इस चाहत को इल्ज़ाम क्या दें।

जिस्म की तलब तो मिट जाती है इक लम्हे की मुलाक़ात में,
जो दिल को न महका सके, उस जज़्बे को पैग़ाम क्या दें।
- शफ़क़ रऊफ
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2 महीने पहले

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