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                            ये गुच्छे रुक जाते हैं।
                                                                 
                            
एक मिलीमीटर।
दो।
एक पिन की नोक से बड़े नहीं।
इसके केंद्र को हवा नहीं मिलती।
साधारण प्रसार (diffusion)
विफल हो जाता है।
इस सीमा को पार करने के लिए
इसे रक्त को पुकारना होगा।

अपने पोषण के लिए
इसे लाल रंग की नई लकीरें बुननी होंगी।
वाहिकाओं के इस विकास के बिना
यह ट्यूमर सो जाता है,
हमेशा के लिए छोटा,
सिमटा हुआ।

यह गणित का मामला है।
आकार का भौतिक विज्ञान!!
मेज़बान (host) की ज्यामिति।
धूल की एक खुराक
कोशिका को तोड़ देती है।
उत्परिवर्तनों (mutations) की गिनती
इसे बेकाबू, जंगली बना देती है।
हम इन आंकड़ों को देखते हैं
ताकि इसे पीछे धकेल सकें,
ताकि इस ख़तरे को रख सकें
शांत, सुप्त और निष्प्राण!!!
-शफ़क़ रऊफ
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3 महीने पहले

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