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लफ़्ज़ों के पीछे के एहसास

                
                                                         
                            “लफ़्ज़ों के पीछे के एहसास
                                                                 
                            

सोचना, समझना और लिखना,
फिर शब्दों को अपना एहसास देना,

उस एहसास को उम्मीदों में ढालना,
फिर उसे दिल में उतारकर

लफ़्ज़ों में बयाँ करना…
बहुत सच्चे और गहरे एहसास होते हैं,

जिन्हें बहुत कम लोग
समझ पाते हैं।

जो समझ पाते हैं,
उनका दिल से शुक्रिया। 
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 सप्ताह पहले

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