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ज़िंदगी भी अपने अंजाम तक पहुँच जाती है।

                
                                                         
                            गुरूर
                                                                 
                            

जब सूरज ढल जाता है,
और चाँद भी अपनी रौशनी समेट लेता है,

तो धीरे-धीरे
हमारी उम्र भी ढलने लगती है,
और एक दिन
ज़िंदगी भी अपने अंजाम तक पहुँच जाती है।

फिर बताओ...

हमें किस बात का गुरूर है?

 
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2 घंटे पहले

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