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मेरे दिल की बात

                
                                                         
                            मेरे दिल की बात 
                                                                 
                            
कभी जिसके बिना
एक पल भी अधूरा लगता था,
आज उसी के बिना
ज़िंदगी जीना सीख रहे हैं।
दिल आज भी चाहता है
कि सब कुछ पहले जैसा हो जाए,
मगर किस्मत के आगे
हर चाहत कहाँ पूरी होती है।
सबसे ज़्यादा दर्द तब होता है,
जब अपना ही कोई
अजनबी बनकर सामने से गुज़र जाए…
और हम चाहकर भी
उसे रोक न पाएँ।
मोहब्बत आज भी कम नहीं हुई,
बस अब उसे पाने की चाह छोड़ दी है।
कुछ रिश्ते दिल में रहते हैं,
ज़िंदगी में नहीं… 
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एक घंटा पहले

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