आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

38 के बाद का प्यार

                
                                                         
                            38 के बाद का प्यार
                                                                 
                            

38के बाद का प्यार,
शोर नहीं करता…
ख़ामोश रहकर भी
दिल की हर बात समझ लेता है।

न रोज़ मिलने की ज़िद,
न हर बात का हिसाब,
बस दिल से एक दुआ होती है—
तुम जहाँ रहो, मुस्कुराते रहो।

38 के बाद का प्यार,
चेहरे की खूबसूरती से नहीं,
ज़िंदगी से थके हुए
दिल की ख़ामोशी से मोहब्बत करता है।

इस उम्र में
“आई लव यू” से ज़्यादा,
“अपना ख़याल रखना”
दिल को छू जाता है।

न सपनों की कोई भीड़ होती है,
न वादों का कोई बोझ,
बस हाथ थामकर
कुछ दूर साथ चलने की चाहत होती है।

38के बाद का प्यार…

किस्मत से नहीं,
समझ और सुकून से मिलता है।

और जब कोई ऐसा मिल जाए,
तो उसे पाने से ज़्यादा,
उसे उम्रभर संभालकर रखना ज़रूरी होता है।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर