फूलों की दुकां खोलिए बाज़ार में कोई
खुश्बू का या तो कोई व्यापार कीजिए
ला कर हर एक शख्स़ को उल्फत की राह पर
वतन ए अज़ीज़ को मेरे गुलज़ार कीजिए
-शब्बीर अज़हर लहरपुरी
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