माटी माथे से लगा, सिर पर कफ़न बाँध जाते फ़ौजी,
फिर कायर का डर देख, मुस्कुराते फ़ौजी!
अपनी माँ की गोद से, भारत माँ की गोद में सो जाते फ़ौजी,
फिर तिरंगे में लिपटकर घर आते फ़ौजी!
बम-बारूद से अपनी दिवाली मनाते फ़ौजी,
सरहद पर अपने ही लहू से नहाते फ़ौजी!
भुला के इश्क़-मोहब्बत और तमाम चाहतों को,
सरहदों की माटी से सच्चा इश्क़ निभाते फ़ौजी!
कड़कती धूप हो या बर्फ़ीली हवाओं की मार,
सीने पर टाँगे बंदूक, हर मौसम सह जाते फ़ौजी!
अपनी हँसती जवानी वतन पर न्योछावर कर जाते फ़ौजी,
देश की ख़ातिर मिटकर भी, अमर हो जाते फ़ौजी!
सरहद की ख़ामोश रातों में, सितारा बन जगमगाते फ़ौजी,
हिमालय का शीश ऊँचा रख, नदियों का मान बढ़ाते फ़ौजी!
हवा में फहराते तिरंगे की छाँव में, 'वंदे मातरम' गाते फ़ौजी!
हवा में स्वतंत्र उड़ते तिरंगे को देख, जब 'जन-गण-मन' गूँजता है,
तब छलकती आँखों की नमी में, बस चेहरा आपका दिखता है फ़ौजी!
जब-जब देश सुनता है उनके अमर बलिदान की गाथाएँ,
हर दिल की गहराइयों से, बस याद आते हैं वो फ़ौजी!
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