किसी के दिल को दुखाना गुनाह है बड़ा,
किसी को बेवजह रुलाना गुनाह है बड़ा।
बन सको तो बनो मुस्कुराह का सबब,
होंठों से तबस्सुम चुराना गुनाह है बड़ा।*
-सीमा फ़रहीन
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