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मुस्कुराहट बाँटना इबादत है, और दिल दुखाना गुनाह..."

                
                                                         
                            किसी के दिल को दुखाना गुनाह है बड़ा,
                                                                 
                            
किसी को बेवजह रुलाना गुनाह है बड़ा।
बन सको तो बनो मुस्कुराह का सबब,
होंठों से तबस्सुम चुराना गुनाह है बड़ा।*
-सीमा फ़रहीन
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3 महीने पहले

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