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नमक जितना इश्क रहे

                
                                                         
                            ना तेरी मोहब्बत का शोर हो
                                                                 
                            
ना मेरी चाहत का हिसाब रहे
बस जब भी जिक्र हो मेरा
तेरे लहजे में थोड़ा लिहाज रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे

ना तू मेरी आदत बने
ना मैं तेरा बोझ बनू
बस जब भी याद आऊं तुझे
चेहरे पे हल्की सी मुस्कान रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे

ना हर रोज मुलाक़ात की जिद्द हो
ना हर पल साथ रहने की प्यास रहे
बस दूर रहकर भी दिल में
एक दूजे की मिठास रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे

तेरी याद का एक सलीका हो
मेरी कमी का भी एहसास रहे
जिंदगी की इस फीकी रोटी में
बस तेरे इश्क़ का स्वाद रहे

बस इतना सा करम रहे
नमक जितना इश्क रहे
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2 महीने पहले

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