हमारी सोच भी कुछ वैसी ही बन जाती है, जिनके संग बैठते हैं, वैसी ही रह जाती है। जिनसे हँसते हैं, जिनसे बातें करते हैं, उनके रंग में हमारी दुनिया बन जाती है।
दोस्त अगर सपने देखने वाले हों, तो आँखों में भी चमक आने लगती है। पर अगर साथ आलसियों का हो, तो मंज़िल भी दूर जाने लगती है।
इसलिए मैं अब सोचकर साथ चुनता हूँ, जो आगे बढ़े, मैं उसी संग चलता हूँ। क्योंकि सोच वही है जो संग से बनती है, और ज़िंदगी उसी रंग में ढलती है।
हर दिन नया सवेरा आता है, नई सोच, नया रास्ता दिखाता है। बस सही साथ मिल जाए तो हर सपना हकीकत बन जाता है
-उदित शर्मा
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