थक हार कर समय बिताना,क्या है सही
मेहनत के पन्नों में हार लिखा ही नहीं
रुकी जीवन रथ को फिर से गति दो
थके हुए मन को,फिर से अनुमति दो
झुकी निगाहों को फिर से सीधी करो
लक्ष्य प्राप्ति की फिर से विधि करो
काटो से भरी है कर्मपथ,कठिन है डगर
लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्राणी गुजरता कई शहर
-सौरभ दीक्षित
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