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गांव घर छोड़कर जा रहे हो विदेश

                
                                                         
                            गांव घर छोड़कर जा रहे हो विदेश
                                                                 
                            
क्यों छोड़ रहे हो अपना प्यारा देश?
मैं तो मर जाऊंगी तेरी याद में
क्या मैं आऊंगी तेरे याद में?
दो पैसे की नौकरी में तूने क्या गंवाएं?
कैसे हम बताएं?
कैसे हम जताएं?
रह जाओ घर पर
हीरा उगाएंगे हम यहीं पर
कम से कम साथ तो रहेंगे
दुःख सुख सब सहेंगे
दुःख सुख सब कहेंगे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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